बुधवार, 19 अगस्त 2026

कैसे करू तारीफ तुम्हारी

तुम्हारी तारीफ़ करूँ भी तो कैसे करूँ प्रिये,
तुम्हें सिर्फ़ खूबसूरत कह दूँ, तो बात अधूरी लगेगी।
तुम्हारे चेहरे की खूबसूरती तो आँखें देख लेती हैं,
मुझे तो वो देखना है
जो तुम्हारी आँखों के पीछे छिपा है।
तुम्हारी हँसी अच्छी लगती है,
पर उससे कहीं ज्यादा
तुम्हारा यूँ अचानक खिल उठना अच्छा लगता है।
और सच कहूँ—
तुम्हारी सबसे खूबसूरत बात तुम्हारा रूप नहीं,
वह एहसास है
जो तुम्हारे होने भर से
मेरे भीतर जाग जाता है।
तुम्हें देखकर मन कहता है—
कुछ लोग खूबसूरत नहीं होते,
खूबसूरती उनके पास आकर
अपना अर्थ पाती है।