बुधवार, 28 जनवरी 2026

वास्तु शांति पूजा सामग्री

हल्दी कुंकुम गुलाल रंगोली चन्दन 50 ग्राम अगरबत्ती भीमसेनी कपूर 100 ग्राम जनेऊ अत्तार की शीशी नारियल जटावाले 8 चावल 2 किलो गेहूं 1 किलो सुपारी सफ़ेद 150 मिश्री 100 ग्राम चीनी 500 ग्राम गुड़ 200 ग्राम सूखा नारियल ४ मिक्स मिठाई 500 ग्राम गाय का घी 1 किलो पिली सरसो 50 ग्राम काले तिल ५० ग्राम उड़द 50 ग्राम सात प्रकार का अनाज (सवा सवा किलो ) 5 प्रकार के फल केले 12 छुट्टे फूल 1 किलो फूलो की माला 5 गुलाब के फूल 10 हवन लकड़ी 2 किलो गोबर के कंडे 4 पैकेट गायत्री हवन सामग्री 500 ग्राम कच्चा धागा बण्डल मौली बण्डल 160 (1 या 2 रूपये के सिक्के शहद 100 ग्राम आम के पत्ते ४ लोहे की कील 3 इंच लम्बे हवन कुंड या 16 ईंटे माचिस दिया नीरांजन घी में भीगी हुई बत्तिया 15 - 20 बाजोट 6 कलश के लिए ताम्बे के लोटे 5 6 ब्लाउज पीस (लाल, पीला, हरा, सफ़ेद 2 , नीला ) लाल सूती वस्त्र 1 मीटर सफ़ेद सूती वस्त्र 2 मीटर सुहाग का साहित्य 1 टॉवल नया 1 साडी सोने की अथवा चांदी की वास्तु प्रतिमा सोने की शलाका पंचरत्न

रविवार, 2 नवंबर 2025

दिल के नैना देख उघार , घट में पावेगा दिलदार ।। धृ।। बैठ एकांत शोध कर पूरा प्रवृत्ति को कर दे दुरा निवृत्ति में सुरति धार ।। १।। छूट जावे माया का थारा मिट जायेगा घोर अँधेरा फिर दिलदार की सूरत निहार ।। २।। दल ऊपर दल चढ़ जा ख़ासा आखरी दल पर कर ले बासा अनहद नाद की सुन झंकार ।। ३।। लालदास का वो रखवारा श्याम सलोना सुन्दर प्यारा मिल उनसे हो बेड़ापार ।। 4

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2025

रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने

रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये सृष्टि चला रहे है, जो पेड़ हमने लगाया पहले, उसी का फल हम अब पा रहे है, रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये सृष्टि चला रहे है ॥ इसी धरा से शरीर पाए, इसी धरा में फिर सब समाए, है सत्य नियम यही धरा का, है सत्य नियम यही धरा का, एक आ रहे है एक जा रहे है, रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये सृष्टि चला रहे है ॥ जिन्होने भेजा जगत में जाना, तय कर दिया लौट के फिर से आना, जो भेजने वाले है यहाँ पे, जो भेजने वाले है यहाँ पे, वही तो वापस बुला रहे है, रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये सृष्टि चला रहे है ॥ बैठे है जो धान की बालियो में, समाए मेहंदी की लालियो में, हर डाल हर पत्ते में समाकर, हर डाल हर पत्ते में समाकर, गुल रंग बिरंगे खिला रहे है, रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये सृष्टि चला रहे है ॥ रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये सृष्टि चला रहे है, जो पेड़ हमने लगाया पहले, उसी का फल हम अब पा रहे है, रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये सृष्टि चला रहे है ॥

दिल खो गया श्री वुन्दावन में

दिल खो गया दिल खो गया दिल खो गया दिल खो गया दिल खो गया 
बांके बिहारी श्री वृन्दावन में हाय मेरा दिल खो गया

होता नित रास यहाँ संतो का वास यहाँ 
सदा भाव और भक्ति का अहसास यहाँ 
दिल खो गया बांके बिहारी श्री वृन्दावन में 
हाय मेरा दिल खो गया ।।१।। 

यहाँ यमुना किनारा है श्री निधिवन प्यारा है 
कण कण में बिहारी जी, यहाँ तेरा नजारा है 
दिल खो गया बांके बिहारी श्री वृन्दावन में 
हाय मेरा दिल खो गया ।। २।। 

देखा जबसे तुमको मैं हो गया दीवाना 
नहीं होश रहा कोई हुआ खुद से बेगाना 
दिल खो गया बांके बिहारी श्री वृन्दावन में 
हाय मेरा दिल खो गया ।।३।। 

कहे निखिल सौरभ प्यारे कभी दिल से ना बिसराना
निखिल बस तेरा है हर जनम में अपना लेना 
दिल खो गया बांके बिहारी श्री वृन्दावन में 
हाय मेरा दिल खो गया ।।४ ।।

शनिवार, 2 सितंबर 2023

सिद्ध मंत्र साधना

ॐ 

ॐ नमो सिद्धाय सर्व अरिष्ट निवारनाय
सर्व कार्य सिद्ध कराय ॐ सिद्धाय नमः

ॐ सिद्ध गणेशाय नमः
ॐ सिद्ध सरस्वती माताय नमः
ॐ सिद्धेश्वराय नमः
ॐ सिद्धेश्वरी माताय नमः
ॐ सिद्ध विष्णु देवाय नमः
ॐ सिद्ध महालक्ष्मी माताय नमः
ॐ सिद्ध दत्तात्रेयाय नमः
ॐ सिद्ध गोरक्षनाथाय नमः
ॐ सिद्ध स्वामी हरदासाय नमः
ॐ सिद्ध गुरुदेवाय नमः
ॐ सिद्धाय नमः

ॐ नमो सिद्धाय सर्व अरिष्ट निवारनाय
सर्व कार्य सिद्ध कराय ॐ सिद्धाय नमः

ॐ नमो सिद्धाय सर्व समर्थाय
संसार सर्व दुःख क्षय कराय
सत्व गुण आत्मबल दायकाय, मनो वांछित फल प्रदायकाय
ॐ सिद्ध सिद्धेश्वराय नमः

सिद्ध सिद्धेश्वर शांति दायक तू शांतिदायक तू
सुख कारक सिद्ध विघ्न हर तू सिद्ध विघ्न हर तू
सिद्धियों के ईश्वर सिद्धेश्वर तू सिद्धेश्वर तू
रिद्धि सिद्धि दायक सिद्ध गुरु तू सिद्ध गुरु तू
श्रद्धा भक्ति दायक सिद्ध साईं तू सिद्ध साई तू
कृपा छत्र दाता सिद्ध गोरक्ष तू सिद्ध गोरक्ष तू
सिद्ध सिद्धेश्वर शांति दायक तू शांतिदायक तू

ॐ शांति शांति शांति

सिद्ध प्रार्थना

हे सर्व शक्तिमान

मैं आपकी अज्ञान बालक हु

मेरे शरीर मे आपका निवास हो

मेरे सब कर्म आपकी सेवा हो

कर्मो से उतपन्न पापो की क्षमा हो

मैं आपकी अज्ञान बालक हु

ॐ शांति शांति शांति


है सर्व शक्तिमान

मैं आपसे प्रार्थना करती हूं

मेरे दुर्गुण दुराचार मिटाओ

काम क्रोध लोभ को समाप्त करो

मोह मद मत्सर का अंत करो

मैं आपसे प्रार्थना करती हूं

ॐ शांति शांति शांति


है सर्व शक्तिमान

मैं आपकी शरण मे आयी हु

कर्मेन्द्रियों को अच्छी कार्य शक्ति दो

ज्ञानेन्द्रियो को अच्छी ज्ञान शक्ति दो

मन बुद्धि को अच्छी आत्म शक्ति दो

मैं आपकी शरण मे आयी हु

ॐ शांति शांति शांति


है सर्व शक्तिमान

मैं आत्मसमर्पण करती हूं

सद्गुण प्रेरणा आत्मबल दो

ध्येय प्राप्ति का सिद्ध मार्ग दिखाओ

सुख शांतिदायक कर्म कराओ

मैं आत्म समर्पण करती हूं

ॐ शांति शांति शांति


है सर्व शक्तिमान

मैं आपकी कृपाभिलाषी हु

आप माता हो मा की ममता दो

आप पिता हो पिता का प्यार दो

आप गुरु हो समर्थ बनाओ

मैं आपकी कृपाभिलाषी हु

ॐ शांति शांति शांति

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2023

विचित्रवीर हनुमान स्तोत्र

अस्य श्रीविचित्रवीर हनुमन्मालामन्त्रस्य श्रीरामचन्द्रो भगवानृषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीविचित्रवीरहनुमान् देवता, ममाभीष्टसिद्ध्यर्थे मालामन्त्र जपे विनियोगः । अथ करन्यासः । ॐ ह्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः । ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः । ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः । ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः । ॐ ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । अथ अङ्गन्यासः ॐ ह्रां हृदयाय नमः । ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा । ॐ ह्रूं शिखायै वषट् । ॐ ह्रैं कवचाय हुम् । ॐ ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् । ॐ ह्रः अस्त्राय फट् । अथ ध्यानम् । वामे करे वैरवहं वहन्तं शैलं परे श्रृङ्खलमालयाढ्यम् । दधानमाध्मातसुवर्णवर्णं भजे ज्वलत्कुण्डलमाञ्जनेयम् ॥ ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकालानल प्रभाज्वलत्प्रतापवज्रदेहाय अञ्जनीगर्भसम्भूताय प्रकटविक्रमवीरदैत्य-दानव यक्षराक्षसग्रहबन्धनाय भूतग्रह- प्रेतग्रहपिशाच ग्रहशाकिनीग्रहडाकिनीग्रह- काकिनीग्रह कामिनीग्रह ब्रह्मग्रहब्रह्मराक्षसग्रह- चोरग्रहबन्धनाय एहि एहि आगच्छागच्छ- आवेशयावेशय मम हृदयं प्रवेशय प्रवेशय स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर सत्यं कथय कथय व्याघ्रमुखं बन्धय बन्धय सर्पमुखं बन्धय बन्धय राजमुखं बन्धय बन्धय सभामुखं बन्धय बन्धय शत्रुमुखं बन्धय बन्धय सर्वमुखं बन्धय बन्धय लङ्काप्रासादभञ्जन सर्वजनं मे वशमानय वशमानय श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सर्वानाकर्षय आकर्षय शत्रून् मर्दय मर्दय मारय मारय चूर्णय चूर्णय खे खे खे श्रीरामचन्द्राज्ञया प्रज्ञया मम कार्यसिद्धि कुरु कुरु मम शत्रून् भस्मी कुरु कुरु स्वाहा ॥ ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् श्रीविचित्रवीरहनुमते मम सर्वशत्रून् भस्मी कुरु कुरु हन हन हुं फट् स्वाहा ॥