बुधवार, 12 मई 2021

वेद और मानव सभ्यता #वेद मानव सभ्यता के लगभग सबसे पुराने लिखित दस्तावेज हैं।वेदों की 28 हजार पांडुलिपियाँ भारत में पुणे के भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट में रखी हुई हैं।इन्हे यूनेस्को ने विरासत सूची में शामिल किया है.यूनेस्को की 158 सूची में भारत की महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की सूची 38 है। वेद के चार विभाग है-ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद,इन्ही के आधार पर धर्मशास्त्र,अर्थशास्त्र,कामशास्त्र और मोक्षशास्त्र की रचना हुई। #ऋग्वेद- इसमें पृथ्वी की भौगोलिक स्थिति और देवताओं के आवाहन के मंत्रों के साथ बहुत कुछ है। ऋग्वेद की ऋचाओं में देवताओं की प्रार्थना, स्तुतियां और देवलोक में उनकी स्थिति का वर्णन है। इसमें जल चिकित्सा, वायु चिकित्सा, सौर चिकित्सा, मानस चिकित्सा और हवन द्वारा चिकित्सा आदि की भी जानकारी मिलती है। #यजुर्वेद -यजुर्वेद का अर्थ : यत् + जु = यजु। यत् का अर्थ होता है गतिशील तथा जु का अर्थ होता है आकाश। इसके अलावा कर्म। श्रेष्ठतम कर्म की प्रेरणा। यजुर्वेद में यज्ञ की विधियां और यज्ञों में प्रयोग किए जाने वाले मंत्र हैं। यज्ञ के अलावा तत्वज्ञान का वर्णन है। तत्व ज्ञान अर्थात रहस्यमयी ज्ञान। ब्रह्माण, आत्मा, ईश्वर और पदार्थ का ज्ञान। यह वेद गद्य मय है। #सामवेद- साम का अर्थ रूपांतरण और संगीत। सौम्यता और उपासना। इस वेद में ऋग्वेद की ऋचाओं का संगीतमय रूप है। सामवेद गीतात्मक यानी गीत के रूप में है। इस वेद को संगीत शास्त्र का मूल माना जाता है। #अथर्वदेव- थर्व का अर्थ है कंपन और अथर्व का अर्थ अकंपन। ज्ञान से श्रेष्ठ कर्म करते हुए जो परमात्मा की उपासना में लीन रहता है वही अकंप बुद्धि को प्राप्त होकर मोक्ष धारण करता है। इस वेद में रहस्यमयी विद्याओं, जड़ी बूटियों, चमत्कार और आयुर्वेद आदि का जिक्र है।अथर्वदेव सबसे बड़ा वेद है इसके दो खंड है नीचे दिए गए लिंक पर डावनलोड करके इसका अध्ययन कर सकते है https://vedpuran.files.wordpress.com/2011/10/rigved.pdf https://vedpuran.files.wordpress.com/2011/10/yajurved.pdf https://vedpuran.files.wordpress.com/2011/10/samved.pdf https://vedpuran.files.wordpress.com/2011/10/arthved-part-1.pdf https://vedpuran.files.wordpress.com/2011/10/atharva-2.pdf

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