मंगलवार, 14 सितंबर 2021

गुरुत्वाकर्षण

विषय :- गुरुत्वाकर्षण
कहते हैं न्यूटन ने 'सेब' को गिरते देखा और गुरुत्वाकर्षण का पता लगाया। एक सेब को गिरते देख लिया और पृथ्वी के अंदर गुरुत्वाकर्षण खोज लिया। कितनी चीजें ऊपर को उठ रही थीं.. भाप बनकर जल ऊपर उठता है, पौधे बनकर बीज ऊपर उठते हैं,अग्नि को कहीं भी जलाओ ऊपर की तरफ उठती है; फिर ये नियम क्यों नहीं खोजा कि ये ऊपर किस कारण उठते हैं?ऋषि कणाद ने हजारों वर्ष पहले वैशेषिक-दर्शन में गुरुत्वाकर्षण का कारण बताया।

*1.- संयोगाभावे गुरुत्वातपतनम:-५-१-७(5-1-7)*
(संयोग=जोड़)
*2.- संस्काराभावे गुरुत्वातपतनम:-५-१-१८(5-1-18)*
(संस्काराभावे=अव्यवस्थित, संस्कार =व्यवस्थित)
आगे बढ़ते हुए ऋषि कणाद कहते हैं कि अगर किसी वस्तु में संस्कार है, तब पृथ्वी उसे अपनी तरफ नहीं खींच सकती। संस्कार का अभाव होने पर ही वस्तु गुरुत्व के कारण पृथ्वी पर गिरेगी।
संस्कार ऋषि ने तीन प्रकार के बताए:- 

*1.-वेग, 2.- भावना,3.-स्थितिस्थापक*

तो इन तीन में से वेग संस्कार जिस वस्तु में है; जैसे तीर में हम धनुष से वेग उत्त्पन्न करते हैं तो वह गति करता है जैसे ही वेग संस्कार समाप्त होगा, उतनी दूर जाकर वह अपने गुरुत्व के कारण भूमि पर गिर जाएगा।
पूरी पृथ्वी पर हमारे वैदिक ऋषियों के सिद्धांत हैं, लेकिन फिर भी हम उन्हें दूसरों के नाम से पढ़ने पर विवश हैं।
अर्थात कोई भी वस्तु, जब तक कहीं-न-कहीं उसका जुड़ाव है, वो नीचे नहीं गिरेगी;जैसे:- आम या सेब का टहनी से संयोग जब तक संयोग है तब तक पृथ्वी में कितना भी आकर्षण हो वो वस्तु को अपनी तरफ खींच नहीं सकती जैसे ही संयोग का अभाव हुआ गुरुत्वाकर्षण के कारण वस्तु स्वयं पृथ्वी पर गिर जाएगी
वेदों की ओर लौटो ,कुछ नहीं है अंधी पश्चिमी दौड़ में।

*🚩सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय🚩*

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